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हिन्दु, मुस्लिम सहित सब लोगों में लोकप्रिय थे जर्मन मिशनरी क्रिस्चियन फ्ऱैडरिक शवार्ज़



 




 


क्रिस्चियन फ्ऱैडरिक शवार्ज़ ने पवित्र बाईबल का तमिल भाषा में किया अनुवाद

क्रिस्चियन फ्ऱैडरिक शवार्ज़ (26 अक्तूबर, 1726-13 फ़रवरी, 1798) एक जर्मन लूथरन मसीही मिशनरी थे, जो 1750 में भारत आए थे और उन्होंने बाईबल का अनुवाद करने के लिए विशेष तौर पर तामिल भाषा सीखी थी। उनका जन्म जर्मनी में प्रूसिया के नगर ब्रैंडनबर्ग में हुआ था। उनके पिता का नाम जॉर्ज शवार्ज़ एवं माता का नाम मारग्रेट ग्रण्ट था। वह 8 अगस्त, 1749 को पादरी नियुक्त हुए थे और पहले उन्होंने कुछ समय इंग्लैण्ड में अंग्रेज़ी भाषा की शिक्षा प्राप्त करने हेतु बिताया था। फिर वह 30 जुलाई, 1750 को तामिल नाडू के नगर ट्रैंक्युबार (जिसे आज तरंगमबाड़ी कहा जाता है) पहुंचे थे।


मरहट्टा राजा ने की क्रिस्चियन फ्ऱैडरिक शवार्ज़ की सहायता

ट्रैंक्युबार चाहे क्रिस्चियन फ्ऱैडरिक शवार्ज़ का मुख्य कार्यालय था, परन्तु वह तंजावूर व तिरुचिरापल्ली बहुत जाया करते थे। फिर 1766 में वह तिरुचिरापल्ली में जाकर रहने लगे। वहां पर वह फ़ौजी छावनी में स्थित एक चर्च के पादरी के तौर पर कार्य करते रहे। 1769 में व मरहट्टा राजा तुलजाजी के घनिष्ठ मित्र बन गए। राजा ने श्री क्रिस्चियन फ्ऱैडरिक की हर प्रकार से सहायता की। राजा ने अपने देहांत से कुछ समय पूर्व अपने गोद लिए बेटे सराभोजी (जिसे सर्फ़ोजी भी कहा जाता है और जो बाद में राजा बना) को शिक्षा देने का कार्य सौंप दिया था। श्री क्रिस्चियन फ्ऱैडरिक ने राजकुमार सर्फ़ोजी को बाकायदा भारतीय गुरुकुल रीति के अनुसार शिक्षा दी, जहां गुरु एवं शिष्य एक साथ रहा करते थे।


हिन्दु मरहट्टा राजा ने क्रिस्चियन फ्ऱैडरिक शवार्ज़ से प्रसन्न हो कर करवाया था चर्च का निर्माण

हिन्दु राजा सर्फ़ोजी ने बाद में अपने गुरु के प्रति प्यार प्रकट करने के लिए एक मसीही चर्च का निर्माण भी करवाया था। यह भारत में सांप्रदायिक एकता की अद्वितीय उदाहरण है।

1779 में अंग्रेज़ अधिकारियों के कहने पर श्री क्रिस्चियन फ्ऱैडरिक ने मद्रास (अब चेन्नई) स्थित मैसूर के शासक हैदर अली (टीपू सुल्तान के पिता) की एक निजी दूतावास पर कब्ज़ा कर लिया था। बाद में जब हैदर अली ने करनाटक पर आक्रमण किया, तो श्री क्रिस्चियन फ्ऱैडरिक को दुश्मन के शिविर के बीच में से सही-सलामत निकल जाने की अनुमति दे दी गई थी।


क्रिस्चियन फ्ऱैडरिक शवार्ज़ के स्कूल में पढ़े थे भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय डॉ. अब्दुल कलाम

1784 में श्री क्रिस्चियन फ्ऱैडरिक ने तजावूर में एक अंग्रेज़ी स्कूल स्थापित किया, जो आज भी ‘सेंट पीटर’ज़ हायर सैकण्डरी स्कूल’ के नाम से जाना जाता है। अपने जीवन के अंतिम वर्ष उन्होंने तिरुचिरापल्ली में बिताए। उन्होंने तामिल नाडू के ही नगर रामनाथपुरम में शवार्ज़ हाई स्कूल भी स्थापित किया था। भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय डॉ. अब्दुल कलाम ने इसी स्कूल से अपनी शिक्षा ग्रहण की थी।


आम भारतीय क्रिस्चियन फ्ऱैडरिक शवार्ज़ के द्वारा अंग्रेज़ सरकार से किया करते थे प्रत्येक बात

1798 में श्री क्रिस्चियन फ्ऱैडरिक का निधन हो गया, जब राजा सर्फ़ोजी-द्वितीय ने अभी गद्दी संभाली नहीं थी। उनकी मृतक देह को तंजावूर के महरनोनबुचवाड़ी स्थित सेंट पीटर’ज़ चर्च के कब्रिस्तान में दफ़नाया गया था। उनकी कब्र पर महाराजा सर्फ़ोजी द्वारा श्रद्धांजलि के तौर लिखे गए भावपूरत शब्द आज भी पढ़े जा सकते हैं। राजा ने उस श्रद्धांजलि में लिखा है कि श्री क्रिस्चियन फ्ऱैडरिक को मसीही समुदाय ही नहीं, बल्कि हिन्दु एवं मुस्लिम लोग भी बहुत पसन्द करते थे। इसी लिए जब कभी उन्होंने ब्रिटिश सरकार के अधिकारियों से कोई बात करनी होती थी, तो वह पहले श्री फ्ऱैडरिक तक ही पहुंच करते थे।


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-- -- मेहताब-उद-दीन

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