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पवित्र ‘बाईबल’ के कुछ महत्त्वपूर्ण तथ्य (1-15)



1. यीशु मसीह ने सांसारिक रूप से एक बढ़ई के घर में जन्म लिया, जहां वह बचपन से ही हथौड़े, कीलों व लकड़ियों से खेलते रहे होंगे तथा इन्हीं की सहायता से उन्होंने अपने दुनियावी पिता यूसफ़ के कार्य में हाथ भी अवश्य बटाया होगा और रोम के शासकों ने उन्हें उन्हीं हथौड़ों, कीलों व लकड़ी की सलीब द्वारा जान से मारने का असफ़ल प्रयत्न किया परन्तु परमेश्वर के पुत्र यीशु तीसरे दिन मुर्दों में से जी उठे।


2. पवित्र बाईबल को यीशु मसीह से लगभग 1,500 वर्ष पूर्व लिखा जाना प्रारंभ हुआ था और उसका लेखन यीशु मसीह से 100 वर्ष बाद तक चलता रहा और इसे लिखने में 40 विभिन्न जन का योगदान रहा।


3. पवित्र बाईबल चाहे एक संपूर्ण व समुचित धर्म-ग्रन्थ हैं परन्तु इसमें कुल 66 विभिन्न पुस्तकें हैं। इसके पुराने नियम में 39 एवं नए नियम में 27 पुस्तकें (जिनमें कुछ पत्रियां भी सम्मिलित हैं) हैं। ‘पुराना नियम’ यीशु मसीह के जन्म से पहले का वर्णन करता है, जबकि ‘नयाा नियम’ यीशु मसीह के जीवन एवं उनके बाद की घटनाओं का विवरण है।


4. बाईबल की पांच पुस्तकों ‘ओबद्याह, फ़िलेमोन, 2 यूहन्ना, 3 यूहन्ना एवं यहूदा’ को छोड़ कर शेष सभी 61 पुस्तकें विभिन्न अध्यायों में बंटी हुईं हैं। यह पांचों छोटी पुस्तिकाएं हैं परन्तु यह अन्य पुस्तकों की तरह आयतों में बंटी हुईं हैं। पवित्र बाईबल को पहली बार विभिन्न अध्यायों में बांटने का कार्य 1238 ई. में कार्डीनल ह्यूगो डी एस. कारो ने प्रारंभ किया था और यह 1551 में रॉबटर््स स्टीफ़नस ने संपंन्न किया था।


5. पवित्र बाईबल का सब से लम्बा अध्याय ‘भजन संहिता’ की पुस्तक का 119 अध्याय है, जिसकी 176 आयतें हैं और बाईबल का सबसे छोटा अध्याय भी ‘भजन संहिता’ का ही 117 है, जिसमें केवल दो आयतें हैं। यह भी एक संयोग ही है कि बाईबल का बिल्कुल मध्यवर्ती (मिडल) अध्याय ‘भजन संहिता’ का यही 117वां अध्याय ही है। पवित्र बाईबल की सबसे लम्बी पुस्तक भी ‘भजन संहिता’ ही है, जिसके कुल 150 अध्याय हैं। जैसे कि इसके नाम से ही स्पष्ट होता है कि यह भजनों पर आधारित है। इसके कुल 43,743 शब्द (केवल अंग्रेज़ी) हैं।


6. पवित्र बाईबल की सब से छोटी पुस्तक ‘3 यूहन्ना’ है, जिसका केवल एक अध्याय है और उसके केवल 299 शब्द (अंग्रेज़ी) हैं।


7. पवित्र बाईबल के पुराने नियम की पुस्तक ‘ऐस्तेर’ के 8वें अध्याय की 9वीं आयत बाईबल की सब से बड़ी आयत है, जिसके 90 शब्द हैं। सब से छोटी आयत ‘यूहन्ना’ की इंजील के 11वें अध्याय की 35वीं आयत है, जिसमें केवल दो शब्द (अंग्रेज़ी के शब्द - ‘‘जीसस वैप्ट’’) ‘‘यीशु के आँसू बहने लगे’’ (हिन्दी के 5 हुए) हैं।


8. पवित्र बाईबल में परमेश्वर द्वारा स्वयं कही गई बातें दर्ज हैं। यहोवा (परमेश्वर) ने स्वयं बहुत से लोगों को उन शब्दों को लिखित रूप देने हेतु प्रेरित किया था। परमेश्वर के जो शब्द पवित्र बाईबल में दर्ज हैं, वे सभी मानवता के कल्याण के लिए ही हैं। बाईबल में 3,000 बार ‘‘तब यहोवा (परमेश्वर) ने कहा’’ लिखा गया है।


9. पवित्र बाईबल में बहुत से ऐतिहासिक तथ्य दर्ज हैं और वे सभी पूर्णतया सही हैं। बहुत से लोगों, कुछ विद्वानों ने भी विगत कई शताब्दियों के दौरान अनेकों बार बाईबल को ग़लत सिद्ध करने के प्रयत्न किए परन्तु सदैव असफ़ल रहे।


10. गिडियन्स, वाइक्लिफ़ इन्टरनैशनल के अनुसार अकेले अमेरिका में पवित्र बाईबल की प्रतिदिन 1,68,000 प्रतियां बिकती हैं। यह भी एक ऐतिहासिक तथ्य है कि समस्त विश्व में बाईबल ही अब तक सर्वाधिक बिकने वाली पुस्तक है। यह लगातार ‘बैस्ट सैलर’ पुस्तकों की सूची में पहले स्थान पर रही है।


11. पवित्र बाईबल का अनुवाद 1,200 भाषाओं में हो चुका है।


12. पवित्र बाईबल में आपको एक भी अंतर्विरोध (सैल्फ़-कन्ट्राडिक्शन) नहीं मिलेगा। बहुत से लोगों ने पिछली कई शताब्दियों के दौरान ऐसे कुछ बिन्दु ढूंढने के अनगिनत असफ़ल प्रयत्न किए, परन्तु उन्हें कहीं एक भी ऐसा नुक्ता नहीं मिल पाया कि एक स्थान पर कुछ और लिखा गया है और दूसरे स्थान पर उसी मुद्दे संबंधी कुछ और बल्कि पवित्र बाईबल आपको पूर्णतया अपने-आप में अंतर-संबंधित मिलेगी। पुराने नियम का नए नियम के साथ संपर्क सहजता से जोड़ा जा सकता है। बाईबल में दर्ज अनेकों शिक्षाओं में भी कहीं आपस में कोई विरोध नहीं है। यह बात सचमुच आश्चर्यजनक है कि बाईबल जब हज़ारों वर्षों के दौरान लिखी गई, परन्तु उसमें कभी कोई ऐसी ग़लती नहीं हुई कि जिस की कोई आलोचना की जा सके।


13. पवित्र बाईबल भविष्यवाणियों से भी भरपूर धर्म-ग्रन्थ है, जिस में 3,200 भविष्यवाणियां ऐसी हैं, जो पूर्ण हो चुकी हैं और 3,100 भविष्यवाणियां ऐसी भी हैं, जो अभी घटित होनी शेष हैं।


14. पवित्र बाईबल को विभिन्न भागों में 40 के लगभग विभिन्न लोगों ने लिखा है। पौलूस रसूल (सेंट पॉल) ने बाईबल की 13 पुस्तकें लिखीं थीं। यह भी माना जाता है कि नए नियम की पुस्तक ‘इब्रानियों’ भी उन्होंने ही लिखी थी। मूसा ने बाईबल की प्रथम पांच पुस्तकें - उत्पत्ति, निर्गमन, लैव्यव्यवस्था, गिनती, व्यवस्था-विवरण - लिखीं थीं।


15. पवित्र बाईबल के पुराने नियम की पुस्तक ‘नीति वचन’ (प्रोवर्ब्स) का अधिकतर भाग बादशाह सुलेमान द्वारा लिखित माना जाता है। इस्रायल के बादशाह दाऊद के पुत्र बादशाह सुलेमान का राज्य यीशु मसीह से 970 वर्ष पूर्व से लेकर 930 वर्ष पूर्व तक अर्थात 40 वर्षों तक रहा था। प्राप्त तथ्यों के अनुसार बादशाह सुलेमान ने ‘नीति वचन’ के 1 से 29 तक अध्याय लिखे थे। 30वें अध्याय का संकलन आगर बिन जकेह ने किया था, इसी लिए इसे ‘आगर के नीति-वचन’ भी कहा जाता है। बाईबल के कुछ अंग्रेज़ी अनुवादों (विशेषतया जे.पी.एस. - अमेरिका की ‘ज्यूइश पब्लिकेशन सोसायटी’ का अनुवाद) को यदि पढ़ें, तो इस 30वें अध्याय का अनुवाद पूर्णतया ‘यशायाह’ के 40वें अध्याय की 12वीं से 14वीं आयत के समान जान पड़ता है; इसी लिए इस अनुवाद को संपूर्ण मान्यता प्राप्त नहीं है। ‘नीति वचन’ का 31वां अध्याय बादशाह लीमुएल ने लिखा था।


क्रमशः


Mehtab-Ud-Din


-- -- मेहताब-उद-दीन

-- [MEHTAB-UD-DIN]



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